मेरा दूसरा पति


Antarvasna, hindi sex stories: मैं एक नौकरीपेशा महिला हूँ मेरी उम्र 35 वर्ष है मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं मैं घर का काम भी संभालती हूं और अपनी जॉब पर भी ध्यान देती हूं। मेरे पति का व्यवहार मेरे प्रति कुछ समय से बदलने लगा था वह अपने काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर ही रहा करते थे लेकिन वह मुझे कभी कुछ बताते नहीं थे मैंने उनसे कई बार इस बारे में कहा कि आप मुझे बताते क्यों नहीं है तो वह मुझे कहने लगे कि राधिका लेकिन मुझे तुम्हें बताने की क्या जरूरत है। उनके स्वभाव से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी और ना चाहते हुए भी मैं अपनी सहेली संजना को इस बारे में हर रोज बता दिया करती थी। संजना मुझे कहती कि मैं बहुत ही खुश नसीब हूं कि मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं और वह मेरा बहुत ध्यान रखते हैं। संजना और मैं एक ही ऑफिस में काम करते हैं और हम दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त हैं मैंने जब संजना से कहा कि मेरे पति का व्यवहार मेरे प्रति बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

वह मुझे कहने लगी कि राधिका ऐसा होता है अब तुम्हारी शादी को 10 वर्ष भी तो हो चुके हैं तुम्हारे पति घर की जिम्मेदारियों में कुछ ज्यादा ही उलझे हुए हैं शायद इसी वजह से वह तुम्हें समय नहीं दे पाते। मैंने भी संजना से कहा कि शायद तुम ठीक कह रही हो क्योंकि वह काफी परेशान रहने लगे हैं और मेरे पास उनके लिए बिल्कुल समय नहीं होता है घर के खर्चे भी दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। मैं जब भी संजना से बात करती तो मुझे काफी हल्का महसूस होता और मैं हमेशा ही अपने दिल की बात उससे कह दिया करती थी। एक दिन संजना घर पर आई हुई थी उस दिन मेरे पति भी घर पर हो थे उन्होंने किसी बात को लेकर मुझे संजना के सामने ही ऊंची आवाज में कह दिया तो मुझे यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मैंने उन्हें कहा कि आपको ऐसा नहीं कहना चाहिए था लेकिन उन्हें लगा कि वह कहीं भी गलत नहीं है शायद इस वजह से उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा और संजना भी उस दिन घर चली गई।

अगले दिन जब मैं ऑफिस गई तो मैंने संजना को कहा कि कल के लिए मैं तुमसे माफी मांगना चाहती हूं संजना कहने लगी कि कोई बात नहीं राधिका ऐसा कभी कबार हो जाता है। हम दोनों के बीच अब झगड़े बढ़ते ही जा रहे थे इस बात से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी और मैं काफी ज्यादा परेशान होने लगी थी। मैं कुछ समय के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी लेना चाहती थी तो संजना ने मुझे कहा कि यदि तुम चाहो तो तुम हमारे साथ घूमने के लिए चल सकती हो। संजना और उसका परिवार घूमने के लिए गोवा जा रहे थे मैंने संजना से कहा कि लेकिन संजना मेरा आना तो संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि तुम तो जानती ही हो कि बच्चे भी स्कूल जाते हैं और मेरे पति का व्यवहार तो तुम्हे पता ही है वह मेरे साथ कहीं घूमने के लिए नही आएंगे। संजना मुझे कहने लगी कि लेकिन राधिका तुम फिर भी कोशिश तो करो लेकिन मैंने संजना को मना कर दिया था संजना और उसका परिवार गोवा घूमने के लिए चले गए थे मेरा भी काफी मन था और मैं चाहती थी कि मैं भी अपने पति के साथ घूमने जाऊं लेकिन मैं उन्हें कुछ कहती तो वह मुझ पर ही गुस्सा हो जाते इस वजह से मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा। मैंने भी अपनी जिंदगी से समझौता कर लिया था और बस मैं सिर्फ अपनी जिंदगी काट रही थी मेरे जीवन में ना तो कुछ नया हो रहा था और ना ही मेरे साथ कुछ अच्छा हो रहा था। एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौट रही थी तो उस दिन मेरे स्कूटी से एक्सीडेंट हो गया मेरा जब मेरी स्कूटी से एक्सीडेंट हुआ तो मैं काफी ज्यादा चोटिल हो गई थी जिस वजह से मुझे हॉस्पिटल भी जाना पड़ा। जब उस दिन मैं घर लौटी तो उस दिन मेरे पति का मूड बिल्कुल ठीक नहीं था और उन्होंने मुझे कहा कि अब एक मुसीबत और हो गई जब उन्होंने मुझे यह कहा तो मैंने उनसे कुछ भी नहीं कहा मेरा उनसे बात करने का बिल्कुल भी मन नहीं था। दिन-ब-दिन वह बदलते ही जा रहे थे वह पहले ऐसे नहीं थे लेकिन अब उनके व्यवहार में काफी ज्यादा बदलाव आ गया था जिस कारण मैं भी उनसे कम ही बात किया करती थी। कुछ दिनों बाद मैं ठीक होने लगी तो मैं ऑफिस जाने लगी और जब संजना ऑफिस आई तो वह मुझसे अपने गोवा के बारे में बात कर रही थी उसने मुझे बताया कि उसे गोवा में कितना अच्छा लगा और वह काफी खुश थी। उसके जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था और एक तरफ मैं थी जो काफी ज्यादा परेशान होती जा रही थी मेरे जीवन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था और मैं बहुत ही ज्यादा परेशान हो गई थी। मैं सिर्फ यही सोचती थी कि क्या मुझे कभी मेरे पति का प्यार मिल पाएगा इसी कशमकश में मेरी जिंदगी कटती जा रही थी। मेरे पति का व्यवहार बिल्कुल भी बदला नहीं था वह हर रोज मुझसे सिर्फ झगड़ते ही रहते थे झगड़ने के अलावा वह मुझसे कभी कोई बात नहीं करते थे।

हमारे पड़ोस में एक लड़का रहने के लाया था उसका नाम समीर है समीर मुझे अच्छा लगने लगा था और उससे मेरी बातचीत भी होने लगी थी मैं जब भी समझ से बात करती तो मुझे काफी हल्का महसूस होता है मैं अपने दिल की बात से मेरे से कह दिया करती तो वह भी मुझे कहता कि आप चिंता मत किया कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा आपके पति का व्यवहार बदल जाएगा लेकिन यह बिल्कुल भी संभव नहीं था और मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह कभी बदलने भी वाले हैं या नहीं लेकिन समीर अक्सर मेरे हाल चाल तो पूछ लिया करता और वो मुझसे मिलने के लिए घर पर भी आता था एक रोज वह मुझसे मिलने के लिए घर पर आया उस दिन मैं अकेली घर पर थी और घर पर कोई भी नहीं था बच्चे खेलने के लिए गए हुए थे और मैं उस दिन ऑफिस से जल्दी घर लौट आई थी मेरे पति अपने काम के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे।

जब समीर मुझसे मिलने के लिए आया तो समीर मुझे कहने लगा आज बच्चे घर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। मैंने समीर से कहा बच्चे खेलने के लिए गए हुए हैं समीर ने उस दिन मेरे हाथ को पकड़ा तो मुझे अच्छा लगा और मैं उस दिन काफी अकेला महसूस कर रही थी। सेक्स तो मेरे जीवन में दूर-दूर तक नही था मेरे पति के साथ मेरा सेक्स जीवन बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। मैंने समीर से कहा आज तुम मुझे अपना बना लो। समीर यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और मैंने जब उसके लंड को अपने मुंह में लिया तो उसके लंड को अपने मुंह में लेकर मुझे अच्छा लगने लगा। समीर भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था उसने मुझे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था। वह इतना ज्यादा खुश था कि मुझे कहने लगा तुम ऐसे ही मेरे लंड को चूसती रहो मैंने उसके लंड को बहुत देर तक चूसा और उसकी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा दिया उसकी उत्तेजित इतनी अधिक हो गई कि वह अपने लंड को मेरी चूत में डालना चाहता था मेरी चूत अब उसके मोटे लंड को लेने के लिए तड़प रही थी उसने मुझे अपनी बाहों में लिया और वह मुझे मेरे बेडरूम में ले गया। मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे कि वह मेरा पति है समीर ने जब उस दिन मेरे कपड़े उतारकर मेरी ब्रा और पेंटी को किनारे रखा तो मैंने उसे कहा तुम मेरे स्तनों को अच्छे से चूसो और उसने मेरे बूब्स को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह में लेकर चूसा। जब वह मेरे बूब्स को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था तो उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मुझे भी अच्छा लग रहा था। मैंने उसे कहा कि तुम मेरी चूत को चाटो लेकिन उसने अपने लंड को मेरे स्तनो पर रगडना शुरु किया मुझे अच्छा लग रहा था। उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया मेरी चूत पर उसकी जीभ का स्पर्श होते ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे अंदर से पूरी ताकत बाहर निकल आई हो।

मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा था मेरी चूत से इतना अधिक पानी निकल चुका था कि जब उसने अपने गरम लंड को मेरी चूत पर लगाया तो मेरे अंदर एक अलग प्रकार की गर्मी पैदा होने लगी। मेरी चूत से अधिक मात्रा में पानी बाहर निकलने लगा उसने मेरी चूत के अंदर लंड को धक्का देते हुए घुसाया और जैसे ही उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा चुका था। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था मैंने उसे कहा मैं तुम्हारे ऊपर से आना चाहती हूं। मैं उसके ऊपर आ गई थी मैंने उसके लंड को चूत के अंदर ले लिया तो वह कहने लगा तुम्हारी चूत बहुत टाइट है उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक चला गया था। अब मैंने उसे इतनी खुश कर दिया था कि वह बड़ी तेजी से मेरी चूत मार रहा था जब वह मेरी चूत पर प्रहार करता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था। मैं भी बहुत ज्यादा खुश थी अब वह मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करे जा रहा था जिससे कि

मुझे बहुत मजा आ रहा था काफी देर तक ऐसा करने के बाद जब उसने मुझे कहा कि मेरा माल गिरने वाला है तो मैंने उसे कहा कि क्या इतनी जल्दी तुम्हारा माल गिरने वाला है। उसने कहा कि हां मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं और मेरा माल मैं तुमसे चूत मे गिराना चाहता हूं और उसने मेरी चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया। मैंने अब अपनी चूत को साफ़ किया और मेरी चूत को साफ करने के थोड़ी देर बाद ही मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरु किया और काफी देर तक मैं उसके लंड को ऐसे ही चूसती रही और उसके लंड को चूस चूस कर मैंने उसका वीर्य बाहर निकाल दिया था। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैंने उसके वीर्य को अपने मुंह के अंदर ही ले लिया और उसकी सारी गर्मी को मैंने शांत कर दिया। समीर का मुझसे मिलना होता ही रहता था वह जब भी मिलता तो हम दोनों संभोग जरूर किया करते।


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