लंड को डालो ना


Antarvasna, Hindi sex stories मेरा नाम अजय है मैं कानपुर का रहने वाला हूं कानपुर में मेरे पिताजी काफी वर्ष पहले आ गए थे हम लोगों का गांव भी कानपुर के पास ही है लेकिन हम लोग अब कानपुर में ही रहते हैं। मेरे पिताजी मुझे बहुत प्यार करते हैं मैं कोई भी गलती करता हूं तो उसके बावजूद भी वह मुझे माफ कर देते हैं लेकिन मेरी मम्मी मुझे हमेशा डांटती रहती है और कहती है कि तुम कब बड़े होंगे तुम्हारी उम्र हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी तुम हमेशा शरारत करते रहते हो। मैं एक दिन अपने दोस्त के साथ उसकी दुकान पर बैठा हुआ था हम दोनों बात कर ही रहे थे तभी सामने से एक लड़की आई हो वह कहने लगी क्या यह दवाई मिल जाएगी। मेरे दोस्त ने दवाई का नाम देखा और उसे कहा हां यह दवाई मिल जाएगी उसने उस लड़की को दवाई दे दी और मुझे तो उसे देखते ही जैसे प्यार हो गया था।

वह मेरा पहली नजर का ही प्यार था मैंने उस लड़की को दिल से अपना मान लिया था मैं बहुत ज्यादा खुश था कि कम से कम मेरे जीवन में कोई लड़की तो आई नहीं तो मैं इतने वर्षों से अकेला ही था मुझे कोई लड़की पसंद आती ही नहीं थी। मैंने अपने दोस्त से कहा यार यह लड़की तो मुझे बहुत पसंद आई मुझे इसके बारे में पता करवाना है वह मुझे कहने लगा चलो हम तुम्हारी मदद करते हैं और उस लड़की के बारे में पता करवाते हैं। मैंने उसे कहा लेकिन हमें उसके बारे में मालूम कैसे पड़ेगा वह कहने लगा तुम चिंता ना करो मैं देख लूंगा, मेरे दोस्त का नाम राघव है वह बड़ा ही तेज है यदि उसे कुछ भी कह दो तो वह तुरन्त सारी चीजों की व्यवस्था कर देता है। जब उसने मुझे कह दिया था कि मैं उसका नंबर तुम्हें दिलवा दूंगा तो वह मुझे उसका नंबर दिलवार ही रहता मुझे राघव के ऊपर पूरा भरोसा था। वह मुझे कहने लगा तुम उस बारे में सोचना छोड़ दो उसकी सारी जानकारी मैं तुम तक पहुंचा दूंगा राघव को जैसे की इन सब चीजों में मजा आता था। उसने अपने कंधों पर अब यह जिम्मेदारी ले ली थी कि वह उसके बारे में पता करेगा राघव ने कुछ दिनों बाद उसके बारे में सारी जानकारी मुझे बताई राघव जब मुझे मिला तो वह कहने लगा उसका नाम शालिनी है और उसका नंबर भी मैं तुम्हें दे देता हूं।

उसने मुझे शालिनी का नंबर भी दे दिया वह कहने लगा उसके कॉलेज की पढ़ाई अभी कुछ दिन पहले ही पूरी हुई है और वह स्कूल में पढ़ाती है उसके पिताजी सरकारी स्कूल में टीचर हैं उसकी मां घर पर ही रहती है और वह तीन बहने हैं। मैंने राघव से कहा अरे भैया तुम तो कमाल के हो तुम्हारी तो बात ही निराली है तुमने तो शालिनी का पूरा चिट्ठा मुझे दे दिया तुमने तो उसके बारे में मुझे सब कुछ बता दिया। वह मुझे कहने लगा क्या तुमने मुझे ऐसे ही समझा है मैंने जब जिम्मेदारी ली थी तो मैंने तुम्हें उसी वक्त कह दिया था कि मैं तुम्हारे पास शालिनी की सारी जानकारी पहुंचा दूंगा। राघव ने तो उसका नंबर और उसका घर का पता भी मुझे दे दिया था मेरे पास अब शालिनी की सारी जानकारी थी बस मुझे ऐसा कुछ करना था जिससे कि शालिनी और मेरे बीच रिश्ता बन सके। सबसे पहले मेरे लिए तो यह भी चुनौती थी कि मैं शालिनी से बात कैसे करूंगा क्योंकि मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शर्म आती थी इसके लिए मेरे दोस्त ने मेरी बहुत मदद की। मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि तुम शालिनी बात कर लो तुम बिल्कुल भी उसकी चिंता मत करो, मैंने शालिनी से बात करने की सोच ली थी। मैंने जब शालिनी को फोन किया तो उससे मेरी बात फोन पर नहीं हो पाई लेकिन उसके बाद मैंने उससे मिलने की सोची मैं उसके स्कूल के बाहर खड़ा हो गया। जब उसकी स्कूल की छुट्टी हुई तो मैं शालिनी को देखता रहा उसके बाद जब मैं उसके पास गया तो मेरी हिम्मत उससे बात करने की नहीं हो पाई और उस दिन मैंने उससे बात नहीं की। एक दिन मैं शालिनी के स्कूल के बाहर चला गया और उस दिन मैंने शालिनी से बात कर ही ली मैंने शालिनी से बात की तो वह मुझे कहने लगी क्या तुमने मुझे ऐसी वैसी लड़की समझा है जो तुम मुझसे बात कर रहे हो और मुझ पर तुम लाइन मार रहे हो।

शालिनी भी टेढ़ी खीर थी वह इतनी आसानी से मेरे हाथ नहीं आने वाली थी मुझे उसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। करीब 6 महीने हो चुके थे मैं 6 महीने तक सिर्फ शालिनी के पीछे ही घूमता रहा लेकिन उसने मुझे कभी भाव नहीं दिया मुझे यह बात बहुत बुरी लगने लगी कि अब शायद शालिनी  को मैं अपने दिल की बात नहीं कह पाऊंगा क्योंकि 6 महीने हो चुके थे और 6 महीने में मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा जिससे कि शालिनी से मैं बात कर पाता। मैंने शालिनी को कई बार कहा लेकिन उसने मुझे साफ तौर पर मना कर दिया और कहने लगी मुझे यह सब चीजें बिल्कुल भी पसंद नहीं है यदि तुम मेरा पीछा करते रहोगे तो तुम अपना ही समय बर्बाद करोगे। मुझे भी लगा कि जाने दो मेरी दाल गलने वाली नहीं है इसलिए मुझे शालिनी का पीछे छोड़ना ही पड़ा और मैंने शालिनी के बारे में सोचना छोड़ दिया। काफी समय हो चुका था जब मैंने शालिनी को देखा भी नहीं था एक दिन शालिनी मुझे दिखी जब शालिनी मुझे दिखी तो मैं उसे देखता ही रहा फिर मैंने देखा की उसके पीछे तीन लड़के जा रहे थे जो कि उसे काफी परेशान कर रहे थे मैंने सोचा मुझे ही कुछ करना पड़ेगा। मैं दौड़ता हुआ गया और मैंने शालिनी का हाथ पकड़ लिया शालिनी मेरी तरफ देखने लगी और वह मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा तुम चुपचाप चलती रहो। उसने भी मेरा हाथ पकड़ा हुआ था वह चुपचाप चलती रही जैसे ही हम लोग गली के अंदर घुसे तो मैंने उसे कहा वह देखो तुम्हारे पीछे कुछ लड़के आ रहे थे इसलिए मुझे यही ठीक लगा शायद हो सकता है तुम्हें बुरा लगा हो।

शालिनी ने मुझे कुछ नहीं कहा मैं वहां से चला गया लेकिन शायद शालिनी के दिल में मेरे लिए कुछ होने लगा था और जब शालिनी और मैं उसके बाद मिले तो शालिनी मुझसे कहने लगी मैंने तुम्हें गलत समझा अजय तुम बहुत ही अच्छे हो और मैं तुम्हें कभी समझ ही नहीं पाई। मुझे लगा तुम दिल के अच्छे नहीं हो तुम एक आवारा लड़के हो लेकिन तुम वैसे बिल्कुल भी नहीं हो। अब शालिनी के दिल में मेरे लिए जगह थी और मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी कि कम से कम शालिनी ने मुझे समझा तो सही नहीं तो शालिनी मेरे बारे में गलत ही समझती थी। वह मुझे कभी समझ ही नहीं पाई थी लेकिन उसके बाद हम दोनों के बीच दोस्ती हो गई और हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय एक दूसरे के साथ बिताने लगे। जब भी शालिनी को मौका मिलता तो वह मेरे साथ समय बिताया करती और हम दोनों साथ में मूवी भी देख लिया करते थे। जैसे जैसे समय बीतता जा रहा था वैसे ही हम दोनों के बीच में नज़दीकियां और बढ़ती जा रही थी और शायद हम दोनों को एक दूसरे से प्यार होने लगा था। मैं तो शालिनी से पहले ही प्यार करता था लेकिन अब शालिनी के दिल में भी मेरे लिए जगह थी और वह मुझे प्यार करने लगी थी। एक दिन शालिनी ने मुझे प्रपोज किया तो मैं बहुत खुश हुआ और मैंने उसे गले लगा लिया उस दिन के बाद शालिनी और मेरा रिश्ता बढ़ने लगा। हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे शालिनी मेरा बहुत ध्यान रखती है और मैं भी उसका बहुत ध्यान रखता हूं।

शालिनी ने एक दिन मुझे कहा तुम क्या आज मुझसे मिलने मेरे घर पर आ सकते हो मैंने उसे कहा शालिनी मैं तुमसे मिलने आ जाता हूं मैं उससे मिलने के लिए उसके घर पर चला गया। ना जाने उसके दिल में उस दिन क्या चल रहा था वह मुझे कहने लगी तुमने बहुत अच्छा किया जो मुझसे मिलने आ गए। मैंने उसे कहा क्या आज घर पर कोई नहीं है तो वह मुझे कहने लगी नहीं आज घर पर कोई भी नहीं है इसीलिए तो मैंने तुम्हें घर पर बुलाया है लेकिन शालिनी के दिल में कुछ और ही चल रहा था। उसने मेरे होठों को चूमना शुरू किया तो मेरे अंदर से भी गर्मी बाहर निकलने लगी मैं उसके होंठों का रसपान करने लगा मैंने उसके रसीले होठों का रसपान काफी देर तक किया और उसके होठों से मैंने खून निकाल दिया। मैंने जैसे ही शालिनी के स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह अपने मुंह से सिसकिया लेने लगी और उसे मजा आने लगा था। वह बड़ी तेज आवाज मे सिसकियां ले रही थी जिससे कि उसके अंदर की गर्मी बढ़ने लगी मैंने जब शालिनी के कपड़े उतारकर उसे नंगा किया तो उसकी लाल रंग की पैंटी और ब्रा देखकर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया।

जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ तो मैंने शालिनी से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो लेकिन वह कहने लगी नहीं मैं ऐसा नहीं करूंगी। मैंने उसे अपने प्यार का वास्ता दिया तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे अच्छे से चूसने लगी वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चुसने लगी। जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को धकेलते हुए डाला तो मैने उसे तेज गति से चोदना शुरू किया उसे बड़ा मजा आने लगा। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही धक्के देते रहो मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बहार हो रहा था तो मुझे बड़ा मजा आता और वह मेरा साथ बड़े ही अच्छे से दे रही थी। जैसे ही मेरा माल शालिनी की योनि में गिरा तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मेरी सील तोड़ कर मुझे अपना बना लिया है मुझे बहुत खुशी है कि तुम मुझसे प्यार करते हो। मैंने उसे कहा शालिनी मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना मैं अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। शालिनी ने मुझे गले लगाया हम दोनों ने दोबारा से एक दूसरे को किस किया जिससे कि हम दोनों दोबारा उत्तेजित हो गए और एक दूसरे के साथ दोबारा सेक्स संबंध बनाए।


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